बादामी, ऐहोले, पत्तदकल or Badami Aihole Pattadakal

13:19 Steampunk 0 Comments

बादामी, ऐहोले, पत्तदकल or Badami Aihole Pattadakal
इस भ्रमांड के इतिहास में
कुछ पन्ने मेरे भी हैं
सदियों पहले, मैंने जनम लिया
इस धरती पर अपनी छाप छोड़ी
आने वाली पीड़ियों के लिए
पथ्हरों को चीर कर लिखी
मेरे युग की कहानियां
सैंकडों शिल्पकारों को सिखाया
शिल्पी बन कहानियां लिखने का गुर
फिर उनके हाथों के जादू ने
पिरोया इतिहास कुछ यूँ की
बादामी, ऐहोले, पत्तदकल or Badami Aihole Pattadakal
पत्थर बोल उठे, नाच उठे
कभी कहानी सुनते तो कभी
पूछते तुमसे पहेलियाँ, कभी
एक निर्मल छवि बस देते हुए
देखोगे तो पाओगे छोडी हैं मैंने
न केवल शिल्प्कारियों की कला
पर उन पलों का लेखा जोखा
जिनको था मैंने देखा और जिया
बादामी, ऐहोले, पत्तदकल or Badami Aihole Pattadakal Remove featured image
वो उन्माद और वो उल्हास
जो देता आया है आनंद और जीवन
वो देवी देवता, जिनसे ले पाठ
आज भी तुम देते लेते हो दिशा
वो नौ रस और कलाएंवो जीव जंतु और क्रीडाएं
जो मिली धरोहर में और
जिनको संभाला पाला तुम्हारे लिए
छोडे हैं अपने समय के निशान
झीलों के किनारे, पहाडों के ऊपर
स्तंभों पे, दीवारों पे, छत पे
सीडियों पे, कलाकृतियों में
बादामी, ऐहोले, पत्तदकल or Badami Aihole Pattadakal
यह धरोहर है मेरे जीवनकाल की
छोड़ आई जिसे तुम्हारे लिए
इसे संभल रखना उनके लिए जो
अभी आये नहीं मुझसे मिलने
– a poem in Hindi on Badami Aihole Pattadakal

You Might Also Like

0 评论: